कामचोरी के खिलाफ बोलने पर, जिल्लत और धमकी!
आज IGIMS (इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पटना) में जो घटित हुआ, वह मामला वीडियो के माध्यम से आपके सामने है।
वीडियो बनाने के क्रम में, मेरे से वीडियो बंद करवाया गया। उसके बाद IGIMS के superintendent (जिनका नाम मनीष XYZ) था, उनके पास ले जाया गया। कुछ देर उनके गेट पर खड़ा रखा गया। फिर उनके कैबिन से लगभग 7-8 आदमी जो पहले मौजूद थे, सारे लोगों के निकलने के बाद मुझे, एक गार्ड और एक नर्स के साथ अंदर ले जाया गया।
Superintendent मनीष XYZ ने नरम लहजे में ही, बिना परमिसन वीडियो ना बनाने तथा मुझे जेल भेजने और मेरे पर कारवाई करने की बात कही। साथ ही उदाहरण के तौर पर कहा कि तुम्हारे घर में बेटी-बहन रहती है, वहां पर कोई वीडियो बनायेगा तो तुम क्या करोगे? जवाब में मैंने भी बोला मैं किसी गलत नियत से वीडियो नहीं बना रहा था। और जहां का वीडियो बना रहा था, वहां कोई महिला मौजूद नहीं थी। इतना ही नहीं मैंन तो आपके गार्ड से और नर्स से भी जानना चाहा था कि इडोस्कोपी के लिए 128 नं. रूम काउंटर पर बैठता/बैठती है, वे कहां है। जिसका किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया। और इस लेट-लतीफी का भुक्तभोगी केवल मैं ही नहीं हूं। आप चाहें तो पुरे प्रकरण को C.C.T.V कैमरा में देख सकते हैं। किसी ने मेरी एक नहीं सुनी। मेरे से सारे फोटो-वीडियो डीलीट करवाया गया।
जब superintendent ऑफिस से बाहर आया तो एक सिविल ड्रेस आदमी जो superintendent जी के साथ था...मुझे मारने-पीटने की धमकी दी। (जो वहां पर यदि कैमरा होगा तो 12/07/2018 को 3:30 से 4:00 तक C.C.T.V मे भी मिल सकता है)...फिर उस व्यक्ति ने मुझे धक्का देते हुए बाहर जाने को कहा।
#आपलोगों_से_कुछ_सवाल
किसी भी कामचोर, चाहे वह किसी भी विभाग का हो...उसके खिलाफ बोलने वालों के साथ ऐसा होना चाहिए क्या?
मैंने कोई अपराध किया था क्या?
Note- मौजूदा वीडियो...वीडियो Hide कर देने से वीडियो डीलीट नहीं हो पाया था।
मनिष कुमार
पत्रकारिता छात्र, पटना।
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