यौन शोषण/उत्पीड़न...Sexual Exploitation Harassment



यौन शोषण-उत्पीड़न/ Sexual Exploit-Harassment
यौन शोषण किसी के साथ, उम्र के किसी पड़ाव में हो सकता है. केवल यह कहना की यौन उत्पीड़न लड़कियों या महिलाओं के साथ ही होता है, तो यह सरासर गलत होगा. पर हां, ज्यादातर केस में लड़कियाँ या महिलायें ही होती है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शोषण बड़ो के साथ हो तो, वे खुद को Protect कर सकते हैं. पर बच्चों के साथ हो तो, वे क्या करें?
अपने देश भारत में संस्कार-संस्कृति का बड़ा ख्याल रखा जाता है.सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण भी परिवार के लोग इस तरह के मामलों को उजागर नहीं करते हैं. जिसके फलस्वरूप, अपने साथ हो रहे यौन उत्पीड़न का प्रोटेस्ट तो दूर की बात, बच्चे समझ ही नहीं पाते की आखिर उनके साथ हो क्या रहा है! अधिकतर लोगों में जागरुकता का अभाव होने के कारण, इस तरह के मामलों की शिकायत ही नहीं हो पाता.
जब समझते हैं तब तक बहुत देर हो चुका होता है, फिर कुछ लोग आत्मनिर्भर होने के बाद पब्लिकली ऐसे घटनाओं का जिक्र करते हैं.
जबकि, यौन उत्पीड़न की शिकायत करने के बाद पुलिस, डॉक्टर व फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम इस जांच को पूर्ण करके संबंधित व्यक्ति को न्याय दिलाने में मदद करते हैं.
▪दुनिया भर में यौन उत्पीड़न के मामलों के आधार पर भारत का चौथा स्थान है.
▪भारत में हर एक घंटे में करीब यौन उत्पीड़न की तीन घटनाएं होती है.
▪वहीं हर दिन औसतन यौन उत्पीड़न के 75 मामले दर्ज किए जाते हैं.
▪वर्ष 2016 में यौन उत्पीड़न के करीब 1,15,731 मामले विचाराधीन थे.
▪थॉम्पसन रॉयटर्स फॉउंडेशन के एक सर्वे में बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा के मामलों में दिल्ली दुनिया के सबसे खराब महानगरों के तौर पर सामने आया.
इतना ही नहीं, अब पटना-गया-मुजफ्फरपुर जैसे जगह भी अछूते नहीं रहे ऐसी घटनाओं से.
मनिष कुमार,
छात्र पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग,
काॅलेज ऑफ काॅमर्स, पटना.
----- देवियों पल-पल खुद को बचाना इस संसार में..क्योंकि गैर तो गैर, कई भेड़िये छुपे रहते हैं रिश्तों की आड़ में...
शायद आपलोगों को याद हो तो पिछले साल का एक सोशल मीडिया अभियान से पता चला की दुनिया में यौन उत्पीड़न के कितने शिकार लोग अब तक चुप थे.
------2017 में अपने दो छोटे बच्चों के साथ बिस्तर में लेटी New York की Alyssa Milano के किसी दोस्त ने हार्वे वाइन्स्टाइन पर चर्चा बढ़ाने का एक तरीका सूझाया. हार्वे वाइन्स्टाइन Hollywood के बड़े Producer हैं जिन पर तीन दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने यौन शोषण का आरोप लगा था.
मिलानो ने ट्विटर पर लिखा अगर आपके साथ भी बचपन से अब तक कोई शोषण जैसा अपराध हुआ है तो आप इस ट्वीट के जवाब में Me too लिखिए. अगली सुबह तक उनके पास 53000 जवाब आ चुके थे. उसके बाद से दुनिया भर की करोड़ों महिलाएं इस अभियान में Me too लिख कर शामिल हुई और ट्विटर के साथ शुरू हुआ यह सिलसिला फेसबुक और सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफॉर्मों तक भी पहुंच बना चुका था. जिस तेजी से यह अभियान आगे बढ़ रहा था उसे देख कर लगा कि दुनिया की हर महिला ने इस तकलीफ का, कभी ना कभी सामना जरूर किया है.
औरतें अपने साथ हुई घटना का ब्यौरा भी दे रही थी जिनमें बलात्कार से ले कर दुर्व्यवहार और इस तरह की तमाम हरकतों का जिक्र था. पहले 48 घंटे में ही इस हैशटैग को 35 लाख से ज्यादा बार ट्वीट किया. कुछ ने सिर्फ Me too लिख कर बिना किसी ब्यौरे के छोड़ दिया तो हजारों  पुरुषों ने भी "आई हैव" लिखा. मिलानो ने समाचार के एक एजेंसी को बताया कि इस पहल के पीछे विचार था कि वाइनस्टाइन की घटना का जिक्र कर पीड़ितों के बारे में बात करे. बाद में पता चला कि कितनी महिलाएं हैं जो आज भी इस पीड़ा को झेल रही हैं. मिलानो ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि लोगों को यह पता चलेगा कि इसका परिमाण कितना बड़ा है, कितने सारे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन काल में, इस दुनिया में, इस देश में यह सब झेला है."
एक अभियान की शक्ल ले चुके इस पहल ने लोगों को कई चीजों से वाकिफ कराया था. इनमें लाखों कहानियां ऐसी थी जिनका पहली बार जिक्र हुआ था कम से कम सार्वजनिक रूप से. ज्यादातर पीड़ित अपने साथ हुई ज्यादाती में चुप रहना बेहतर समझा क्योंकि ऐसे मामलों में आरोप लगाना और उसे साबित करने की प्रक्रिया, शायद पूरी दुनिया में लंबी और कहीं ज्यादा तकलीफदेह होता है.
2014 में भी इसी तरह का एक सोशल मीडिया ट्रेंड सामने आया था. "येसऑलवीमेन" जिसमें महिलाओं ने यौन शोषण से जुड़े अनुभव बांटे थे. उस वक्त ट्विटर के यूजर कम थे तब भी करीब चार दिनों में इस हैशटैग को 12 लाख बार इस्तेमाल किया था.
ऐसे ज्यादातर मामलों में यौन शोषण करना वाला पीड़िता का परिचित ही होता है. इस तरह के यौन अपराधों के पीछे ज्यादातर ●बॉयफ्रेंडों, ●परिवार के सदस्यों, ●पारिवारिक दोस्तों, ●दोस्तों ●सहकर्मीयों और ●क्लासमेट्स का हाथ होता है.
यूनिसेफ का कहना है कि किशोर लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा किसी देश के सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में भी बाधा बन सकती है. लक्ष्यों के तहत 2030 तक गरीबी, भूख और लैंगिक असमानता के साथ-साथ यौन उत्पीड़न को भी खत्म करना एक बहुत बड़ी चुनौती है. क्योंकि इस डिजिटल युग में लोग मानसिक विकृति का शिकार ज्यादा हो रहे हैं.
रिपोर्ट कहती हैं कि जिन लड़कियों को सेक्स या वैसी किसी चीज के लिए मजबूर किया गया, उनकी तादाद 2.5 करोड़ से बहुत ज्यादा हो सकती है क्योंकि बहुत सी लड़कियां इस बारे में किसी को बताना ही नहीं चाहती है. इसके अलावा 2.5 करोड़ के आंकड़े में बहुत से देशों का डाटा शामिल नहीं है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीकी देश मलावी में यौन हिंसा से निपटने के लिए प्रोजेक्ट्स चलाये जाते है. वहां बच्चों को स्कूलों में आत्मरक्षा के उपाय सिखाये जाते हैं.
भारत में भी यौन शोषण के समस्याये कम नहीं है. इसलिए  यहाँ के स्कूलों में भी ऐसे प्रोजेक्ट्स पर जोड़ देने की जरूरत है.
यूनिसेफ यह भी कहती है कि बच्चों को शोषण से बचाने के लिए बेहतर कानूनों की जरूरत है. इसके अलावा सामाज में जागरूकता और समर्थन की भी दरकार है, इन चीजों पर ध्यान दिया जाए तभी हालात में कुछ बेहतरी की उम्मीद की जा सकती है. साथ ही सरकार के साथ मिलकर बनायी गयी ऐसी योजनाएं खासी सफल होती हैं जिनमें शिक्षा और जागरूकता दोनों समाहित हो.
■बच्चों को पहले से कुछ ऐसी बातें सिखाएं जिनसे वे खुद समझ पाएं कि उनके साथ कुछ गलत हो रहा है या हुआ है.
●हाल ही में भारत में कराये गये एक सर्वे में पाया गया कि देश के आधे बच्चों के साथ कभी-कभी यौन दुर्व्यवहार  हुआ है. इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि मात्र 3%  मामलें में ही शिकायत दर्ज की जाती है.
●बच्चों को समझाना चाहिए कि उनका शरीर केवल उनका है. कोई भी उनकों या उनके प्राइवेट हिस्से को बिना उनकी मर्जी के नहीं छू सकता. उन्हें बताये कि अगर किसी पारिवारिक दोस्त या रिश्तेदार का छूना या चूमना अजीब लगें तो अपने 3-4 भरोसेमंद लोगों को इसके बारे में जरूर  बतायें.
●बच्चे नहाते समय प्राइवेट पार्टस के बारे में पूछे तो, उसका सही-सही नाम बताये और साथ ही बच्चा समझने लायक हो तो उसके सही-गलत इस्तेमाल के बारे में भी बताये.
●बच्चों को छोटे उम्र में ही नहलाने या शौच के समय समझाने की कोशिश करें कि वे अकेले में ही कपड़े बदले तो बेहतर.
●बच्चों के साथ बातचीत के रास्ते हमेशा खुले रखे. उनको भरोसा दिलाएं कि वे आपसे कुछ भी कह सकते हैं और आप उनकी बातों को गंभीरता से भी लेंगे. खास कर माँ-बाप से संकोच की वजह से बच्चा किसी से भी कुछ कह नहीं पाता.
●कभी-कभी बच्चा काफी दिन पढ़ाई के लिए बाहर रहता है. घर आने पर वह बेवजह गुमशुम रहता हो. इस संभावना की ओर भी ध्यान दें कि कहीं ऐसा कुछ तो नहीं जो, उसे अंदर ही अंदर परेशान कर रहा है.
●बच्चों को यह समझायें की उनको अपने प्राइवेट पार्टस को नहीं दिखाने चाहिए. यदि कोई बड़ा व्यक्ति ऐसा कुछ करने बोलता है तो उसका विरोध करें. बाकी के सदस्यों के साथ, चर्चा करें.
■बाल दिवस यानि 14 नवंबर 2012 को भारत में लागू हुए पॉक्सो (POCSO) कानून में बच्चों से यौन अपराधों के मामले में कड़ी सजा का प्रावधान है.

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