क्योंकि पेशे से हम पत्रकार है!!

समय के अभाव से गुस्साते परिवार-रिश्तेदार है
साथ ही ना अच्छा घर ना कार है
क्योंकि पेशे से हम पत्रकार है!

नेता-मंत्री हो या पुलिस-अधिकारी
सारे करते घपले-घोटाले और भ्रष्टाचार है
वैसे पेशे को करते ललकार है
क्योंकि पेशे से हम पत्रकार है!

टूटे हो जूते या फटा हो शर्ट परवाह नहीं करते
क्योंकि हमारे जाने से रैली, धरना या कार्यक्रमों में मचता हाहाकार है
अब क्या कर सकते साहब पेशे से हम पत्रकार है!

चीजों को जानते हुए भी नहीं बोलते या नहीं लिखते
तो ये ना समझे की हम नासमझ गवार है
परतें दर परतें खोल के,
सांप भी मार दें और लाठी भी ना तोड़े
हम उतने समझदार है
क्योंकि पेशे से हम पत्रकार है!

धनी गरीब से हमें फर्क नहीं पड़ता
सबको दिलाते उसका अधिकार है
बेबाक और निस्पक्ष अंदाज में,
समाज एवं राष्ट्र हीत ही हमारा आधार है
क्योंकि पेशे से हम पत्रकार है!

पैसों की खातिर खबरों से इमान बेंचते
वैसे पीले कलम के सिपाही को,
बिरादरी का देते दुत्कार है
क्योंकि पेशे से हम पत्रकार है!

बाकी के तीनों स्तंभ सच्चाई से अपना काम करें
उसी निगरानी के लिए,
स्तंभ के रूप में मिला स्थान चार है
क्योंकि पेशे से हम पत्रकार है!

ज्यादातर स्वभाव से हम होते मिलनसार है
पर जब पानी सर से गुजरे
तब दुश्मनों का दुश्मनों और यारों का यार है
अरे भाई पेशे से हम पत्रकार है!

परिस्थिति चाहे कोई भी हो
दिन हो या रात हो, बोर्डर हो आर्डर हो
खाना हो या जेल खाना हो, बिलकुल नहीं घबराते
अपने काम को हमेशा मानते शानदार है
हा-हा-हा...क्योंकि पेशे से हम पत्रकार है और सिर्फ पत्रकार है!

मनिष कुमार
पत्रकारिता छात्र,
काॅलेज ऑफ काॅमर्स, पटना।

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